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जिसके आँचल की छाया में बचपन मेरा बीता है,
जिसकी उंगली पकड़ पकड़ कर चलना मैने सीखा है।

जिसने मुझको शिक्षा दी हर बुरे काम से बचने की,
जिसने राह दिखाई मुझको सही मार्ग पै चलने की।

जिसने मुझे सिखाया हर एक मुश्किल से टकराना,
मुश्किलें चाहे कितनी भी हों न मुश्किलों से घबराना।

सारी खुशियाँ दी मुझको सारे जहां से लाकर,
धन्य हुआ मेरा जीवन ऐसी माँ को पाकर।

में दुआ करता हूँ मेरी जिंदगी में ऐसा मुकाम आये,
मेरी जिंदगी का हर एक पल तेरे कुछ काम आये।

मेरे पास शब्द नहीं हैं तेरा शुक्रिया अदा करने के लिए, में हमेसा तेरा आभारी रहूंगा क्यों कि जो मुझे तूने दिया वो कोई और नहीं दे सकता। सर्मिन्दा हूँ कि तेरा बीटा होने का फर्ज अदा नहीं कर पा रहा हूँ कागज के टुकड़े कमाने में लगा हूँ ताकि अपनी जरूरतें पूरा कर सकूं और अपने लिए एक बेहतर मुकाम बना सकूं। मुझे याद हैं वो दिन जब मुझे जरा सा बुखार होता था तो तू पूरी रात नहीं होती थी मुझे परेशान देखकर तेरी भूख प्यार भाग जाती थी। ठण्ड की रातों में अपना बिस्तर छोड़कर कर मुझे बार बार देखना कि में ठीक से ओढ़कर सोया कि नहीं। तेरे नरम हाथों से मेरे चेहरे को सहलाना, हजारो लाखों बार तेरे होठों का मेरे चेहरे को प्यार से चूमना आज भी महसूस करता हूँ। मुझे बोर्ड एग्जाम में पास हो जाने के लये तेरा भगवन से दुआ मांगना पास हो जाने पर प्रसाद बाँटना में कभी नहीं भूल सकता। मेरी कामयाबी के लिए 24 घंटे भूखा रहकर मंदिर जाकर मन्नतें मांगना तेरे ये कर्ज में अपनी जिंदगी देकर भी नहीं चूका सकता। आज तेरे एक सबल का जबाब देना चाहता हूँ में जब भी घर से शहर अपने काम पै जाता हूँ तब तू मुझे घर की दहलीज तक छोड़ने आती है और मुझे तब तक देखती रहती है जब तक में तेरी आँखों से ओजल नहीं हो जाता और में पीछे मुड़कर नहीं देखता तूने ये सबल कई बार पूंछा है कि में पीछे मुड़कर क्यों नहीं देखता, में पीछे मुड़कर इसलिए नहीं देखता क्यों कि उस समय तेरी आँखों में आंशूं होते हैं और मेरी आंखें भी नाम होती हैं में अपने आंशूं तो छिपा सकता हूँ पर तेरी आँखों में आंशूं नहीं देख सकता, तेरी आँखों में आंशूं में बर्दास्त नहीं कर सकता।

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