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आपको जो तकलीफ हो रही है उसे महसूस कर सकता हूँ में आप जो दर्द महसूस कर रहे हो
उसका अंदाजा लगा सकता हूँ, अगर आप मुझे सुन रहे हैं तो निश्चित ही अपनी लाइफ में कुछ
बड़ा अचीव करना चाहते हैं खुद को ऐसे मुकाम पर पहुँचाना चाहते हैं जो बहुत कम लोगों को
नशीब होता है। डेफेनटली आपको वो सब मिलेगा जो आप डिसर्व करते हो, आपके सारे ड्रीम
पूरे होंगे जो आपने देखे हैं।
आप ये नाकामयाबी की मार झेल रहे हो ना में उसे समझ सकता हूँ लगातार मिल रहे
रिजेक्शन का दर्द फील कर सकता हूँ, कुछ कर गुजरने की भूख महसूस कर सकता हूँ में,
आपकी आँखों में अधूरे सपनो की कमी साफ दिखाई दे रही है, ये फेलियर जो आप देख रहे हो
इसके पीछे की कड़बाहत समझ सकता हूँ में, ये आग जो आपके सीने में जल रही है उसकी
तपिस महसूस कर सकता हूँ में।
दोस्तों जलने दो खुद को इस आग में यही आग आपको एक दिन ऐसा हथियार बना देगी
जिसका कोई तोड़ नहीं होगा, और ये दर्द आपको हो रहा है न ये दर्द ही आपको इतना स्ट्रांग
बना देगा की आपको हरा नहीं सकता, ये कुछ कर गुजरने की भूख ही आपके अंदर इतनी
नॉलेज भर देगी जिसका कोई मुकाबला नहीं कर सकता, और ये लगातार मिल रहे फेलियर से
ही आपको इतना एक्सपिरेंस हो जायेगा कि आप जो भी करना चाहेंगे आसानी से कर सकेंगे।
इस सबके बाद आपके अंदर एक ऐसी शख्सियत पैदा होगी जो वर्षों बाद जन्म लेती है। आपको
वो मुकाम मिलेगा जो हर किसी को नशीब नहीं होता, बस आपको रुकना नहीं है हार मनके
कायरों की तरह चुपचाप नहीं बैठना क्यों इस दुनियाँ में जितने भी कामयाब लोग हैं उन्होंने ने
इतनी मुसीबतें और बुरा वक्त देखा है कि आप सोच भी नहीं सकते बस उन्होंने कभी हार नहीं
मानी और दिन रात मेहनत की है इसीलिए वो आज कामयाब हैं

आपको भी खुद पर भरोसा कर ना होगा कि आप वो सब कर सकते हो जो करना चाहते हो और आप वो सब कर ने मैं कैपेबल हो, दिन रात एक करना होगा और अपनी सफलता की कीमत चुकानी होगी और हर एक मुसीबत से लड़ना होगा उसके बाद दुनियां की कोई भी ताकत आपको कामयाब होने से कोई नहीं रोक पायेगी।

जा रहा हूँ तेरी जिंदगी से बहुत दूर हमेशा के लिए अपने बेअसर प्यार को समेट कर ले जा रहा हूँ अब में तुझे कभी नहीं मिलूंगा मेरी परछाई भी नज़र नहीं आएगी। अब तुझे मेरी बजह से परेशान नहीं होना पड़ेगा किसी के ताने भी सुनने को नहीं मिलेंगे अब तुझे शर्मिंदा होने की जरुरत नहीं पड़ेगी। अब तू आज़ाद है जो चाहे करना किसी को जबाब देना नहीं पड़ेगा। तेरे बीमार होने पर मेरा बार बार तेरी तबियत के लिए पूंछना, खाना न खाने पर मेरा चिल्लाना अगर तेरे लिए बोझ था तो अब ये बोझ नहीं उठाना पड़ेगा मैंने कुछ ज्यादा ही उम्मीद करली थी तुझसे मुझे नहीं पता था की मेरा तेरी परवाह करना तेरी लिए बन्दिस जैसा है पर अब में सच से रूबरू हो चूका हूँ इस लिए उस रिश्ते की जंजीर से तुझे आजाद कर रहा हूँ तेरी गलियों में मेरी रहगुजर नहीं होगी। मुझे कोई सिकबा गिला नहीं है तुझसे बस एक अफ़सोस है कि में तेरी ख़ुशी की बजह बनना चाहता था लेकिन तेरी परेशानी का सबब बन गया मगर अब और नहीं तुझे परेशान कर सकता। तुम्हे ये जानने की जरुरत नहीं है कि में कहाँ जा रहा हूँ में खुद नहीं जनता कि कहाँ जा रहा हूँ। इस दुनिया की भीड़ में न जाने मेरा चेहरा कहाँ खो जायेगा, इन अँधेरे रास्तों में मेरा बजूद फ़ना हो जायेगा बेसे भी में एक ऐसे रस्ते पै जा रहा हूँ जिसकी कोई मंजिल नहीं शायद इन अंधेरों में कहीं खो जाना ही मेरी मंजिल है आखिर में एक बात बोलना चाहता हूँ हर इंसान चाहता है कि उसे खुदा मिल जाये मगर हर किसी को खुदा नहीं मिलता, सब बोलते हैं खुदा के बारे में मुझे सबका तो नहीं पता लेकिन मैंने खुदा को देखा तेरे अक्स में अफसोस कि मैंने खुदा को भी खफा कर दिया इसलिए अब और ये गुनाह नहीं कर सकता मेरा चले जाना ही मुनासिफ है।

तलाश कर रहा हूँ खुद की शायद मैंने खुद को कहीं खो दिया है सालों से खुद से मिला नहीं हूँ रोज नये नये लोगों से मिलता हूँ ढेर सारी बातें करता हूँ पता नहीं कब से खुद की आवाज नहीं सुनी मैंने परछाइयों के पीछे भाग रहा हूँ में जिनका कोई बजूद ही नहीं है। सपनों का बोझ मुझे मुझसे मिलने कि इजाजत नहीं देता, कभी न पूरी होने वाली इच्छाओं ने मुझे एक मशीन बना दिया है जो सिर्फ काम करती है खुद की परवाह किये बिना। अब ठीक से नींद नहीं आती अच्छे से भूख नहीं लगती है वो हसीं वो ख़ुशी सब गुम हो गई हैं वो शरारतें जो लोगों को चिड़िया करती थी दोस्तों के साथ घंटों गप्पे मरना सब भूल सा गया हूँ घंटों तक अपनी माँ से बात करना उनकी रोज की कहानियां सुनना वो सब लगभग ख़त्म सा हो गया है जिससे मेरी पहचान होती थी अब जो में हूँ वो में नहीं हूँ अब तो मेरे लिबाश में कोई और रहता है जो अपनी जरूरतों और ख्वाबों का गुलाम है जो बिना थके बिना रुका दिन रात भागता रहता है अपने सपनो के पीछे। में देखना चाहता हूँ अपने उस चेहरे को जो छोटी छोटी चीजों से बहुत खुस रहता था, में सुनना चाहता हूँ उसे अक्सर गुनगुनाता रहता था और दोस्तों को शायरियाँ सुनता रहता था अपनी बचकानी हरकतों से दूसरों को हसाता रहता था ढून्ढ रहा हूँ उस मासूमियत को जिसके लोग दीवाने हो जाया करते थे। खोज रहा हूँ उस क्रिकेटर को जो मैच जीतने में अपनी पूरी जी-जान लगा दिया करता था जैसे भारत और पाकिस्तान का मैच हो रहा हो, न जाने कहाँ खो गया वो देश भक्त जो अपने देश की मिटटी के लिए अपनी जान कुर्बान करने की बात करता था। अपने गांव को चमन बनाने के सपने देखता था और इस देश से गरीबी मिटाने की बात करता था। न जाने कहा चला गया वो। काश कि फिर से मिल पाता में खुद से, सुनने को मिल जाये अपनी आवाज, देखने को मिल जाये वो अपना मासूम सा चेहरा जो मेरी ही आँखों से ओझल सा होता रहा है। ये केसा इत्तेफाक है में खुद से ही जुड़ा हूँ अपने ही बजूद को तलाश कर रहा हूँ और एक ऐसी जिंदगी जी रहा हूँ जिसका कोई मतलब नहीं है

में आवाज बनना चाहता हूँ उन बेजुबान जानवरों की जो रोड पर चलते हुए गाड़ी से कुचल कर मार दिए जाते हैं या अपनी भूख मिटाने के लिए उनका क़त्ल कर दिया जाता है। में आवाज बनना चाहता हूँ उन बेसहारा बूढ़े माँ बाप की जिनकी औलाद उनको मरने के लिए अकेला छोड़ कर चले गए। में आवाज बनना चाहता हूँ उन वीर सिपाहियों की जिन्होंने इस देश के लिए अपनी क़ुरबानी देदी। में आवाज बनना चाहता हूँ उन किसानों की जिन्होंने बेबसी और भूख से तंग आकर आत्मा हत्या कर्ली। में आवाज बनना चाहता हूँ उन युवतियों और मासूम बच्चियों की जो दरिंदों की हवस का शिकार हो गईं। में आवाज बनना चाहता हूँ उन मासूम बच्चों की जो नंगे बदन ट्रैफिक सिग्नल पर भीख मांगते हैं में आवाज बनना चाहता हूँ उन लाखों करोड़ों लोगों की आज भी इंसाफ के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं मगर उनको इंसाफ नहीं मिलता। में आवाज बनना चाहता हूँ उन कमजोर लोगों की जो अपने हक़ के लिए आवाज तो उठाते हैं मगर कोई नेता या व्यबसाई द्वारा उनकी आवाज को दवा दिया जाता है।

Can Lokpal make India a Corruption Free Nation ?

अजीब कानून है हमारे देश का यहां ईमानदार और कमजोर लोगों की कोई कीमत नहीं, इस देश में चमन को कायम रखने के लिए हमारे जवान अपनी जान की कुर्वानी दे रहे हैं और हमारे देश में उनकी शहादत की कोई कीमत नहीं। जो लोग ईमानदेरी से काम करते हैं मेहनत मजदूरी करते हैं उनको दो वक्त का खाना भी बहुत मुश्किल से नसीब होता है और जो लोग दिन रात चोरी डकैती लूटपाट और धोखाधड़ी करते हैं वो शान से जीते हैं। सरे कानून कमजोर लोगों के लिए बने हैं जो भी सजा मिलती है वो सिर्फ इन्ही लोगों को मिलती हैं और जो लोग इस देश से गद्दारी करते हैं जो इस देश को लूट रहे हैं वो सीना तानकर चलते हैं उनके लिए कोई कानून है।

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ये अत्याचार अब और बर्दास्त नहीं होता अपनी आवाज बुलंद करनी होगी इस देश में क्रांति लानी होगी कोई तो हाथ उठेगा जो क्रांति की मशाल लिए सबसे पहले आगे आएगा इस तरह कायरों की तरह मर जाने से अच्छा है अपने हक़ के लिए लड़ते हुए मर जाना इस तरह हार मैंने से कुछ नहीं होगा आपके साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उठानी होगी अपना हक़ मांगने से नहीं मिलता इन गद्दारों से छीनना होगा। ये तबाही का मंजर कबतक यूँ देखते रहोगे गिड़गिड़ाने और आँशु बहाने से कुछ नहीं होगा एकजुट होकर इस जंग को जीतना होगा और इन गद्दारों को सबक सीखना होगा। वन्दे मातरम, जय हिन्द, जय भारत

कभी बेसुमार खुशियों से जोड़ देती है,
कभी गर्दिशों में साथ छोड़ देती है।
कौन नहीं चाहता अच्छे दोस्तों का साथ,
मगर नए रिश्तों की भीड़ में दोस्ती दम तोड़ देती है।।

दोस्ती एक आज़ाद एहसास है कब किसे कहाँ मिल जाये कोई नहीं जनता, कब दिल में अपना घर बना लेती है पता ही नहीं चलता। जो प्यार और ख़ुशी दोस्ती से मिलता है वो किसी और रिश्ते से नहीं मिलता और किसी भी चीज की मोहताज नहीं होती न जाती न धर्म न ऊँच न नीच। लेकिन कभी कभी दोस्ती में ऐसी दीवार खड़ी हो जाती है जिसको तोडना नामुमकिन सा हो जाता है जब लोग स्वार्थी हो जाते हैं और जरुरत से ज्यादा उम्मीद करने लगते हैं तो दोस्ती अपना अस्तित्वा ख़त्म कर देती है और दिलों में कुछ अच्छी याद छोड़ जाती है। अपने कुछ ऐसे निशान छोड़ जाती है जिनको मिटना सम्भब नहीं है दोस्ती का ब्रेकअप प्यार से भी ज्यादा कड़वा होता है। में चाहकर भी अपने सबसे अच्छे दोस्त को भूल नहीं सकता बहुत कोसिस करता हूँ की सब ख़त्म हो चूका है लेकिन चाहकर भी उस कड़बे सच को स्वीकार नहीं कर पा रहा हूँ। जब वो मेरा साथ था तो ऐसा लगता था कि में एक नहीं हूँ दो हूँ मेरा एक हिस्सा उसमे है, जब भी उसके साथ होता था तो किसी और चीज की जरुरत ही नहीं होती थी न जाने कितनी मेरी ऐसी मुसीबतों को झेला जो शायद वही कर सकता था कोई और नहीं अगर मेरे दर्द में सबसे ज्यादा कोई रोया है तो वो मेरा दोस्त ही है कोई और नहीं। मेरी हर एक परेशानी को उसने अपना बना लिया था ये कह कर कि तेरे हर ख़ुशी और गम में मेरा हिस्सा है उसने मुझे अपनी हर ख़ुशी देदी थी ये कह कर कि ये ख़ुशी क्या जिंदगी देने की जरुरत पड़ी तो में खुद को खुसनसीब समझूंगा, में शब्दों में बयां नहीं कर सकता जो मुझे उससे मिला वो शायद मुझे कोई और नहीं दे सकता। इस दुनियाँ में कौन किसके के लिए २४ घंटे भूखा रहकर मंदिर जाके ख़ुशी और कामयाबी के लिए दुआ मांगता है शायद मेरे अच्छे कर्मों का फल था जो मुझे ऐसा इंसान मिला किस्मत वालों को ही ऐसे दोस्त नसीब होते हैं, में सबकुछ खोने को तैयार था उसके लिए कोई भी कीमत चुकाने को तैयार था क्यों कि मुझे उसके बिना जीना ही नहीं आता। मगर मेरी किस्मत में शायद उसका थोड़ा सा ही साथ लिखा था शायद उतने ही पल उसके साथ जीने को मिले थे। गलती किसी की नहीं थी बस सब कुछ ख़त्म ही होना था हम दोनों न चाहते हुए भी एक दिन जिंदगी के ऐसे मोड़ पै जाके खड़े हो गए जहाँ से दोनों के रास्ते अलग थे इस दोस्ती के ब्रेकअप ने हम दोनों को तोड़ दिया था और इतना दर्द और तकलीफ हुई थी कि ऐसा लगता था की जिंदगी ही ख़त्म हो गई है वो बहुत ही दर्दनाक हादसा था जिसे हम आज तक स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं में आज भी अक्सर उसकी यादों से लिपट कर रातों को रोटा हूँ

जिसके आँचल की छाया में बचपन मेरा बीता है,
जिसकी उंगली पकड़ पकड़ कर चलना मैने सीखा है।

जिसने मुझको शिक्षा दी हर बुरे काम से बचने की,
जिसने राह दिखाई मुझको सही मार्ग पै चलने की।

जिसने मुझे सिखाया हर एक मुश्किल से टकराना,
मुश्किलें चाहे कितनी भी हों न मुश्किलों से घबराना।

सारी खुशियाँ दी मुझको सारे जहां से लाकर,
धन्य हुआ मेरा जीवन ऐसी माँ को पाकर।

में दुआ करता हूँ मेरी जिंदगी में ऐसा मुकाम आये,
मेरी जिंदगी का हर एक पल तेरे कुछ काम आये।

मेरे पास शब्द नहीं हैं तेरा शुक्रिया अदा करने के लिए, में हमेसा तेरा आभारी रहूंगा क्यों कि जो मुझे तूने दिया वो कोई और नहीं दे सकता। सर्मिन्दा हूँ कि तेरा बीटा होने का फर्ज अदा नहीं कर पा रहा हूँ कागज के टुकड़े कमाने में लगा हूँ ताकि अपनी जरूरतें पूरा कर सकूं और अपने लिए एक बेहतर मुकाम बना सकूं। मुझे याद हैं वो दिन जब मुझे जरा सा बुखार होता था तो तू पूरी रात नहीं होती थी मुझे परेशान देखकर तेरी भूख प्यार भाग जाती थी। ठण्ड की रातों में अपना बिस्तर छोड़कर कर मुझे बार बार देखना कि में ठीक से ओढ़कर सोया कि नहीं। तेरे नरम हाथों से मेरे चेहरे को सहलाना, हजारो लाखों बार तेरे होठों का मेरे चेहरे को प्यार से चूमना आज भी महसूस करता हूँ। मुझे बोर्ड एग्जाम में पास हो जाने के लये तेरा भगवन से दुआ मांगना पास हो जाने पर प्रसाद बाँटना में कभी नहीं भूल सकता। मेरी कामयाबी के लिए 24 घंटे भूखा रहकर मंदिर जाकर मन्नतें मांगना तेरे ये कर्ज में अपनी जिंदगी देकर भी नहीं चूका सकता। आज तेरे एक सबल का जबाब देना चाहता हूँ में जब भी घर से शहर अपने काम पै जाता हूँ तब तू मुझे घर की दहलीज तक छोड़ने आती है और मुझे तब तक देखती रहती है जब तक में तेरी आँखों से ओजल नहीं हो जाता और में पीछे मुड़कर नहीं देखता तूने ये सबल कई बार पूंछा है कि में पीछे मुड़कर क्यों नहीं देखता, में पीछे मुड़कर इसलिए नहीं देखता क्यों कि उस समय तेरी आँखों में आंशूं होते हैं और मेरी आंखें भी नाम होती हैं में अपने आंशूं तो छिपा सकता हूँ पर तेरी आँखों में आंशूं नहीं देख सकता, तेरी आँखों में आंशूं में बर्दास्त नहीं कर सकता।

सुन सकता हूँ मैं वो खामोशियाँ जो कुछ बयां करना चाहती हैं महसूस कर सकता हूँ में वो एहसास जो दिल में ही दम तोड़ रहे हैं हर रोज में अँधेरे के आघोस में तन्हाई की चाहर ओढ़कर सो जाता हूँ इस उम्मीद में कि एक दिन मेरे घर में भी रोशनी आएगी। में खुद को एक अंजाम तक पहुँचाने के लिए हर रोज एक ऐसी लड़ाई लड़ रहा हूँ जिसमे जीत भी मेरी है औरहार भी, किसी मजबूर का दर्द बांटना चाहता हूँ ताकि अपना दर्द थोड़ा कम कर सकूँ मेरे हिस्से में जितनी भी ख़ुशी है वो भी में किसी जरुरत मंद को देदेना चाहता हूँ ताकि किसी को तो ख़ुशी मिले क्यों में ये जान चूका हूँ कि ख़ुशी हर किसी के हिस्से में नहीं आती बस खुद को जिन्दा रखना है मुझे जब तक में खुद को पूरी तरह न अजमालूं मेरी मौत का किसी को शक न हो इस लिए गहरे शांत दरिया में पत्थर फेंकता हूँ खुद को जिन्दा महसूस कर सकूं। हर रोज कुछ अच्छा होने की उम्मीद लेकर निकलता हूँ घर से लेकिन अच्छा नहीं होता जिंदगी के हर मोड़ पै एक मुसीबत कड़ी मिलती है में फिर भी उससे मुस्करा कर गले मिलता हूँ ये सोचकर कि कोई कमी न रह जाये मुसीबतों की। हर रोज एक धोखा, जाने पहचानों की साजिस घेर ही लेती है मुझे। हर रोज कुछ अच्छा होने की उम्मीद लेकर निकलता हूँ घर से लेकिन अच्छा नहीं होता जिंदगी के हर मोड़ पै एक मुसीबत कड़ी मिलती है में फिर भी उससे मुस्करा कर गले मिलता हूँ ये सोचकर कि कोई कमी न रह जाये मुसीबतों की। हर रोज एक धोखा, जाने पहचानों की साजिस घेर ही लेती है मुझे। लेकिन में कायरों की तरह हार मैंने वालो में से नहीं हूँ लड़ते लड़ते मर जाने वालों में से हूँ इस लिए मुझे अब डर नहीं लगता और नहीं कोई शिकायत रहती है जो भी मिलता है दर्द या गम उसे अपना बना लेता हूँ और उसी के साथ जीने की कोसिस करता हूँ मुस्कुराने की पूरी कोशिश करता हूँ ताकि कोई मुझे सहानुभूति न दे क्यों की में बेचारा नई बनना चाहता और नहीं किसी की दया भावना को मोहताज हूँ |

मासूम चेहरा निगाहें फरेबी लबों पे हसी और दिल में देगा है,
मिला हो जिसे दोस्त ऐसा उसे दुश्मनों की कमी क्या है।
जब भी जी चाहे नहीं दुनियाँ बसा लेते हैं लोग,
एक चेहरे पे कई चेहरे लगा लेते हैं लोग।

इंसान कितना फरेबी कितना स्वार्थी होता जा रहा है उसे फर्क नहीं पड़ता कि कौन जी रहा है कौन मर रहा है उसे तो सिर्फ खुद से मतलब है अपनी जरूरतें पूरा होने से मतलब है। कोई नहीं सोचता कि हमने जिसके साथ धोखा किया है उसे कितनी तकलीफ हुई होगी, हमने अपने फायदे के लिए जिसे इस्तेमाल किया है जब उसे सच पता चलेगा तो कितना दर्द होगा। ये सब तो हम कभी सोचते ही नहीं हैं क्यों कि ये सारी बातें तो सिर्फ एक इंसान सोचता है और हमने तो वो सब ख़त्म कर दिया है जिससे हम इंसान बनते हैं हम इंसान ही नहीं रहे हम एक मशीन बन चुके हैं जिसके अंदर न भावनाएं हैं और नहीं एहसास। सिर्फ अपने फायदे के लिए न जाने कितने लोगों के भरोसे का क़त्ल करते हैं न जाने कितने बेगुनाहों की उम्मीदों को तोड़ते हैं जो दिन रात मेहनत करके ईमानदारी से अपने सपनों को साकार करना चाहता है हम अपने थोड़े से फायदे के लिए उसके सपनों को तोड़ देते हैं क्यों कि हमारी नज़र में किसी के सपनो, भावनाओ और जज्बातों की कोई कीमत नहीं है। ये इतना बड़ा गुनाह करके कुछ हांसिल कर भी लेते हैं तो वो किस काम का साहब क्यों की लोगों की बद्दुआएं कभी बेकार नहीं जाती एक न एक दिन अपना असर जरूर दिखती हैं जो ख़ुशी और हम ढूंढ रहे हैं वो ऐसे हांसिल नहीं होता

जिंदगी में ऐसे भी पल आते हैं जब हम बहुत अकेला महसूस करते हैं ये पूरी कायनात मिलकर भी अकेलापन दूर नहीं कर सकती, इस क़यामत की भीड़ में भी खुद को अकेला पाते हैं। दुनिंया भर के शोर में भी सन्नाटे की आवाज सुनाई देती है। कितना भी भाग लें अपनी तन्हाई से मगर इस दुनियां में कोई भी ऐसी जगह नहीं जहाँ तन्हाई पीछा नहीं करती। ख़ुशी के समंदर के किनारे सुकून की एक बूँद के लिए तरसना ही तन्हाई है। ये खालीपन किसी खास इंसान के चले जाने या न होने से होता है सीने में कुछ टूट सा जाता है जिसके टुकड़े किसीको दिखाई नहीं देते, शोर तो बहुत होता है सीने में मगर किसी को आवाज सुनाई नहीं देती। मायूसी घेर लेती है चरों तरफ से साँस लेना भी मुश्किल लगता है वो सबकुछ ख़त्म हो जाता है जिससे एक इंसान इंसान बनता है। अगर कुछ बचता है तो वो है सिर्फ बॉडी और माइंड। उस टाइम जो मानसिक स्थिति होती है उसका अंदाजा लगाना बहुत मुश्किल होता है। अगर ऐसे इंसान को थोड़ा सा प्यार मिल जाये जिसकी वो कमी महसूस कर रहा है या उसके अकेलेपन को बांटने और उसके दर्द में रोने वाला मिल जाये तो उस मरे हुए इंसान में भी जान डाली सकती है।

आज के समय में बहुत रफ्तार से दौड़ती जिंदगी में हम लोग अपना मुकाम हांसिल करने में इतना मस्त हो गए हैं कि हमें कोई फर्क नहीं पड़ता कि इस दुनिया में को जी रहा है और कौन मर रहा है हम कामयाब होने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं किसी भी बेगुनाह कि भवनाओ को कुचलकर और मासूमो की जिंदगी से खिलबाड़ करके आगे भड़ जाते हैं। सुबह से शाम तक न जाने हम कितने लोगो से झूठ बोलते हैं कितने लोगो को धोका देते हैं। ये सब करने के बाद अगर आपको एक अच्छा मुकाम मिल भी जाता है तो क्या आपको सुकून मिलेगा, क्या आप उस बुलंद ईमारत में चैन रह पाएंगे जिसकी दीवारों में न जाने कितने बेगुनाहों की लाशें दफ़न हैं, क्या आप खुश रह पाएंगे उस महल में जो अपने अपना जमीर और ईमान बेचकर बनाया है। में ये नहीं कहता कि बड़ा मुकाम हांसिल करो में तो ये कहता हूँ कि आप वो मुकाम बनाओ अपने लिए जो बहुत काम लोगों को नशीब होता है लेकिन रास्ता सही होना चाहिए। अपनी मेहनत और ईमानदारी से बनाये हुए मुकाम की कुछ और ही बात होती है। और अपनी कामयाबी की धुन में उन लोगो को नजर अन्दाज़ मत करो जो आपकी थोड़ी से सहायता से अपनी जिंदगी में बहुत कुछ कर सकते हैं जरुरतमंद इंसान की सहायता करना हमारा फर्ज है |

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