रुखशत || शायद चला गया तू मेरी जिंदगी से या फिर ये सिर्फ मेरा बहम है सच ये है कि तू जा चुका है मुझसे बहुत दूर पर मेरा दिल आज भी इस सच को कबूल नहीं करता।

आज भी तेरी ख़ामोशी महसूस होती है क्या तू इस ख़ामोशी के साथ जी लेगा। क्या तेरी खुशहाल जिंदगी में तुझे मेरी कमी महसूस नहीं होती, तूने तो कहा था कि हम कभी रुखशत नहीं होंगे। तेरे इस फैसले ने मेरी जिंदगी की कस्ती को बर्बादी के दरिया में डुबो दिया।

क्या तुझे याद है वो तेरा घंटो तक मेरी कॉल का इंतजार करना, मेरी आवाज सुनकर सब कुछ छोड़ कर मेरे पास चले आना, अपने हाथों से मेरी आँखों को छुपाना, क्या याद है तुझे ? या मिटा दिए तूने अपने दिल से उन यादों के नाम – ओ – निशां।

जब भी मिलता था कहता था तुम्हारी आँखें बहुत खूबसूरत लगती हैं इन में आंशू अच्छे नहीं लगते। क्या तुझे पता है ऐसा कोई लम्हा नहीं होता जब मेरी आँखों में नमी हो , आखिरी बार ही सही तू आके देख तो सही आंशुओं के साथ भी मेरी आँखें खूबसूरत लगती हैं।
खैर छोड़ अब तुझे कुछ देखने और समझने की जरुरत नहीं है, खुश रह अपनी दुनियां में। जिंदगी के किसी मोड़ पर तू मुझे मिला तो, मेरी आँखों में नमी तो होगी पर उस नमी में तेरा प्यार कहीं जी रहा होगा और अपने हिस्से कि सांसें ले रहा होगा।

अब यकीं होने लगा है कि तू चला गया है मेरी जिंदगी से मेरे बजूद में अपना अक्स छोड़ कर, हाँ तू चला गया है मेरी जिंदगी से…..!!

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