लोग कहते हैं की पागल

का कोई भरोसा नहीं !

जनाब, कोई ये नहीं समझता

की भरोसे ने ही उसे पागल कीया

इतनी पीता हूँ कि मदहोश रहता हूँ,सब कुछ समझता हूँ पर खामोश रहता हूँ,

जो लोग करते हैं मुझे गिराने की कोशिश,मैं अक्सर उन्ही के साथ रहता हूँ।

तुम अच्छे हो – तो बेहतर,

तुम बुरे हो – तो भी कबूल…

मिज़ाज़-ऐ-दोस्ती में हम,

ऐब-ए-दोस्त नहीं देखा करते..

 

किसी ने मुझसे पूछा की तुम्हारा अपना कौन है मैने हंसते हुए कहा…..

 जो किसी और के लिए मुझे नजर अंदाज न करें…

एक बार भूल से ही कह दिया होता कि हम किसी और के भी हैं,,,,,,

खुदा कसम हम तेरे साए से भी दूर रहते…..,,,!!!

 

 

कितना मजबूर था वो शख्स जिसने मुझसे…

सिर्फ मजबूरी में कुछ रोज़ मौहब्बत की थी…..

लाख कसमें ले लो किसी से

छोडने वाले छोड़ ही देते हैं

तेरे ही ख्याल पर खत्म हो गया ये साल…

 तेरी ही ख्वाहिश से शुरू होगा नया साल…

मेरा जम़ीर मुझसे कहता है क्या देखता है अपनें हाथों कि लकीरों कों ?

वो तेरी तब भी ना थी जब उसका हाथ तेरे हाथ में था ?

जिसे निभा न सकूँ, ऐसा वादा नही करता मैं बातें औकात

से, ज्यादा नहीं करता..

तमन्ना रखता हूं, आसमान छू लेने की पर औरो को

गिराने का, इरादा नहीं करता..

एक चाहत होती है… अपनों के साथ जीने की जनाब..

वरना पता तो हमें भी है …कि मरना अकेले ही है..!

तुमने मुझे छोड़ दिया चलो कोई बात नहीं लेकिन

 जिसके लिए छोड़ा है उसे कभी मत छोडना..!!

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साहेंब कुछ वक़्त खामोश हो के देखा लोग सच में भूल जाते हैं उसने मुझे दिल से निकाला मुझे ये आज याद आया………

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